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जयंत के ‘चौधरी’ बनने की कहानी:4 अक्टूबर ने जयंत को ताकतवर नेता बनाया, 20 सितंबर ने पगड़ी दिलाई; अब 3 स्ट्रेटेजी से खलबली मचा दी

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8 घंटे पहलेलेखक: देवांशु तिवारी

4 दिन बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 11 जिलों की 58 सीटों पर चुनाव हैं। चुनाव के 14 दिन पहले दो लाइनों ने यहां का माहौल बदल ‌दिया। पहली लाइन बीजेपी की, ‘जयंत हमारे साथ आ जाओ।’ दूसरी लाइन जयंत की, ‘मैं वो चवन्नी नहीं जो पलट जाए।’ इसके बाद दोनों में इज्जत की लड़ाई छिड़ गई है।

भाजपा उन्हें ऑफर ठुकराने का सबक सिखाना चाहती है और जयंत अपनी ताकत दिखाना चाहते हैं। लेकिन सिर्फ 139 दिन पहले ‘बड़े चौधरी’ बने जयंत में ये ताकत आई कहां से। इसके पीछे 4 अक्टूबर की तारीख है। आइए इस पूरी कहानी की तरफ चलते हैं…

तारीख: 4 अक्टूबर 2020

दिन: रविवार

पता: बूलगढ़ी गांव, हाथरस

भरी दोपहरी, गांव के बीचोंबीच वाले घर से निकलती चीखें। चारों ओर पुलिस का जमावड़ा और मीडिया। गैंगरेप पीड़िता की मां के आंसू पोछते हुए एक नौजवान ने कहा, “मां, चुप हो जाइए, हम सरकार से आपके हर आंसुओं का जवाब मांगेंगे।” नौजवान को भी कुछ लाठियां पड़ी थीं। पुलिस उसे गांव में नहीं आने दे रही थी, लेकिन वो पुलिस को धक्का देकर पहुंच गया था। इस नौजवान का नाम है, जयंत चौधरी।

फिर…

तारीख: 4 अक्टूबर 2021

दिन: सोमवार

पता: तिकोनिया, लखीमपुर खीरी

फिर जयंत को पुलिस ने घेरा था। फिर जयंत को एक गांव जाना था और एक बार फिर जयंत ने पुलिस को चकमा दिया। तिकोनिया गांव के उस 18 साल के लवप्रीत सिंह के घरवालों के पास पहुंच गए, जिसे लखीमपुर खीरी हिंसा में मारा गया था। लवप्रीत के परिजनों से बात करते हुए जयंत रो पड़े। आठ दिन बाद जयंत फिर लोगों के बीच थे। उन्होंने बोलना शुरू किया, ‘हमें लखीमपुर खीरी हिंसा में शहीद हुए किसानों के नाम याद रखने होंगे। अपने वोटों से इस अत्याचार का बदला लिया जाएगा।’

जयंत को इन घटनाओं ने दो बातें सिखाईं…

पहली:
लोगों को हक दिलाने के लिए आखिरी लम्हे तक लड़ते रहना।

दूसरी: किसी भी कीमत पर अपनी बात से पीछे न हटना।

आरएलडी के सियासी भविष्य पर संकट आया तो जयंत बन गए बड़े चौधरी

4 अक्टूबर 2020 से 4 अक्टूबर 2021 तक आरएलडी की राजनीति में एक बड़ा बदलाव हुआ। 6 मई 2021 में आरएलडी अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह नहीं रहे। तब जयंत पार्टी के उपाध्यक्ष थे। लेकिन 18 दिन बाद उन्हें पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष चुना गया।

पगड़ी समारोह के दौरान खाप पंचायतों के प्रमुखों के साथ जयंत सिंह।

पगड़ी समारोह के दौरान खाप पंचायतों के प्रमुखों के साथ जयंत सिंह।

बात 20 सितंबर 2021 की है। जयंत भीड़ के बीचोंबीच थे। चेहरे पर चमक थी। यूपी, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान की 40 खाप पंचायत के प्रमुख छपरौली में इकट्ठा हुए थे। सभी ने तय किया कि चौधरी चरण सिंह और चौधरी अज‌ित सिंह की तरह ही समुदाय का नया चौधरी… एक नौजवान चेहरा… जयंत होगा।

आते ही बनाई 3 स्ट्रेटेजीः सिर्फ जाटों की पार्टी का ठप्पा हटाया, सोशल एंगेजमेंट बढ़ाया और जमीनी घोषणापत्र तैयार कर रहे

लंदन से पॉलिटिक्स में एमएससी करके आए जयंत ने सबसे पहले 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव की गलतियां सुधारनी शुरू कीं। इसमें जयंत की 3 स्ट्रेटेजी अब तक कामयाब नजर आ रही हैं। इसके बारे में हमने आरएलडी के एससी-एसटी सेल के अध्यक्ष प्रशांत कनौजिया से बात की। आइए जानते हैं…

  • न्याय यात्रा: जयंत चौधरी के आरएलडी अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी ने सोशल इंगेजमेंट पर फोकस किया। सबसे पहले पार्टी ने नोएडा से आगरा तक 63 दिन लंबी ‘न्याय यात्रा’ शुरू की। इसमें हमने गांव-गांव जाकर जाट और दलित समुदाय के लोगों से बात की। उनके मुद्दे जाने। इससे हमारी सोशल रीच बहुत बढ़ गई।
  • बहुजन-उदय अभियान: आरएलडी ने यह अभियान केवल वोट लेने के नहीं चलाया। इसका मकसद था बहुजन समाज के लोगों को पार्टी में पदाधिकारी के तौर पर जोड़ना। पार्टी के उपाध्यक्ष शाहिद सिद्दीकी हैं और दलित समुदाय से आए मुंशीराम पार्टी के महासचिव हैं। इससे लोगों के बीच पार्टी की छव‌ि बनी है कि आरएलडी केवल जाटों की पार्टी नहीं है।
  • लोक संकल्प यात्रा: इस यात्रा में हमने यूपी में अनुसूचित जाति के लोगों, किसानों और महिलाओं के बीच जाकर उनकी बात सुनी। इसका मकसद था जनता के मुद्दों से पार्टी का घोषणापत्र तैयार करना। कनौजिया की बात सुनकर एक बात तो साफ है कि पार्टी ने में सोशल एंगेजमेंट पर काफी काम किया है।

1500 लोगों की डिज‌िटल टीम बनाई, फोकस वाली विधानसभाओं पर 100-100 कार्यकर्ताओं को लगाया

प्रशांत कनौजिया ने बताया कि आरएलडी के पास 1500 लोगों की डिज‌िटल टीम है। ये जनता के मुद्दे, पार्टी के अभियान, दूसरी पार्टी के फैसले गए झूठ और फेक न्यूज को रोकने पर काम करती है। हमारे पास पश्चिमी यूपी की हर विधानसभा सीट पर 100 कार्यकर्ताओं की टीम है।

जयंत की प्रेजेंस से बढ़ेगा वोटिंग ग्राफ

लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्‍लेषक विवेक गुप्ता कहते हैं, “यूपी में तकरीबन 20 सीटें ऐसी हैं, जहां पर जाटों की आबादी 70 से 90 हजार तक है। जयंत ने इन सीटों पर काफी प्रचार किया है। आरएलडी का वोटिंग ग्राफ पिछले चुनाव की तुलना में इस बार निश्चित बढ़ेगा।’’ 2017 में आरएलडी को 1.8% मिला था। ये बढ़ सकता है। उन्होंने इसके पीछे दो बड़ी वजह बताईं।

पहली: किसान आंदोलन के बीच पश्चिमी यूपी में हुई महापंचायतों में जाट समुदाय के साथ जयंत भी शामिल रहे। इससे बीते लोकसभा और विधानसभा चुनाव में लगभग समाप्त हो चुकी आरएलडी को नया जीवन मिला है।

दूसरी: 2013 में मुजफ्फरनगर में दंगे हुए चौधरी समुदाय ने चुप्पी साध ली। इससे मुसलमान आरएलडी से रूठ गया था। इस बार सपा के साथ गठबंधन हुआ है। इससे मुस्लिम वोटरों का आरएलडी के प्रति विश्वास बढ़ा है।

बड़े चौधरी बनने के 177 दिन जयंत की किस्मत का फैसला होगा

आरएलडी ने 23 नवंबर 2021 को सपा के साथ कुल 45 सीटों का करार किया। इसमें से 35 आरएलडी के चुनाव चिन्ह नल पर लड़ेंगे और 10 सपा की साइकिल पर।इस गठबंधन ने मौजूदा माहौल में जयंत को आगे कर दिया है। लेकिन 177 दिन पहले बड़े चौधरी बने जयंत की किस्मत का असल फैसला 10 मार्च को होगा।

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